सचिन सिन्हा की रिपोर्ट
उज्जैन में डिजिटल हाऊस अरेस्ट का मामला,पुलिस ने बंधक दंपत्ति को छुड़ाया,बदमाशों द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग केस की धमकी देकर लाखो रुपए की डिमाण्ड की,बदमाशों ने डराने के लिए दंपति को मजिस्ट्रेट और सीबीआई के फर्जी वारंट भेजें,दंपत्ति डर कर रुपए ऑनलाइन ट्रांजेक्शन करते उसके पहले पुलिस ने ठगी होने से रोका,
एसपी प्रदीप शर्मा ने मामले का किया खुलासा,
उज्जैन के थाना नानाखेड़ा क्षेत्र में डिजिटल हाउस अरेस्ट का मामला सामने आया। यहां तिरुपति हाइट्स कॉलोनी में रहने वाले दंपत्ति के साथ घटना हुई है। यहां रहने वाले मनीष दीक्षित दिलीप बिल्डकॉन कम्पनी में काम करते है। उन्हें बदमाशों ने फोन करके डराया और कहा कि मनी लांड्रिंग का केस दर्ज किया जाएगा। बदमाशों ने मजिस्ट्रेट और सीबीआई के नाम के नकली पत्र भी भेजें। पत्र देख कर दंपति डर गए। इसके बाद बदमाशों ने वीडियो कॉल किया और कहा की यदि किसी को बताया तो गिरफ्तार कर लिया जाएगा और घर के एक कमरे में बंद रहने को कहा। बदमाशों के कहे अनुसार दंपति ने बात मानी और खुद को कमरे में बंद कर लिया व अपने गार्ड से कहा कि किसी को भी घर मे नही आने दिया जाए । बदमाशों द्वारा ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के माध्यम से लाखों रुपए की डिमांड की जा रही थी जिसे दंपत्ति पूरा करने के लिए राजी हो गए थे।

एसपी प्रदीप शर्मा ने बताया कि उन्हें सूत्रों से जैसे ही इस बात की सूचना लगी की पति पत्नी एक घर मे बन्द है तो तत्काल पुलिस को घर भेजा। घर खुलवाया व बंधक दंपति को डिजिटल हाऊस अरेस्ट से मुक्त करवाया। बताया जा रहा है कि दम्पत्ति लाखों रुपए का ट्रांजैक्शन करने ही वाले थे और पुलिस ने पहुंचकर ठगी होने से तत्काल रुकवा दिया।वहीं एसपी प्रदीप शर्मा ने शहर वासियों से अपील की है कि यदि इस प्रकार की कोई भी फोन कॉल आती है या वाट्सएप से वारंट किसी के द्वारा भेजा जाता है तो तत्काल नजदीकी थाने में पहुंचकर पुलिस को सूचित किया जाए। ताकि ऑनलाइन ठगी से बचा जा सके।
क्या है डिजिटल हाऊस अरेस्ट
जैसे-जैसे दुनिया डिजिटल हो रही है ऑनलाइन धोखा के तरीके में भी तेजी से बदलाव आए हैं। डिजिटल हाउस अरेस्ट साइबर क्राइम का नया तरीका है जिसमें स्कैमर्स पीड़ित को वीडियो कॉल पर डरा-धमकाकर घर पर ही कैद कर लेते हैं। इसके साथ ही उसे इतना परेशान करते हैं कि वह पैसे देने पर मजबूर हो जाता है।
-प्रदीप शर्मा–एसपी, उज्जैन,



